आ समां


जाने किस डगर.. तूफान ने,

एक डाल मेरे आँगन में लगा दिया |


भोर की ओस ने अपने आँचल से,

एक कली खिला के मेरे आँगन को महका दिया |


कल तक वीरान था ये मन मेरा,

आज आंगन में बैठने को ललचा गया |


चहकती है अब ये गली वीरान में,

आने जाने वाले लोगो के.. मन महक छलका गया |

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