बारISH
बारिश देख मन मेरा आज मुस्कुराया है|
बरस कर उसने धरती को आज नहलाया है.
हो गयी उसकी गोद हरयाली,
खुश्बुओ से महकाया है|
बारिश देख मन मेरा आज मुस्कुराया है|
घर से छाता...
निकलकर बहार आया है..
उसने मुझे आज फिर धुप दिखाया है.
छाता किया बंद..
उसने मुझे फिर बारिश में भिगाया है.
बारिश देख मन मेरा आज मुस्कुराया है|
रुक- रुक के बरसकर उसने मुझे सिखाया है.
धीरे चलो दौड़ कर किसने अपना प्यास बुझाया है.
पुरानी चीज़ो को उसने आज नदियों में बाहाया है,
क्योंकी नया आज..फिर उसने बनाया है|
बारिश देख मन मेरा आज मुस्कुराया है|
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